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सेटलाइट से जौनपुर के बांकी गाँव मे क्रूड ऑयल मिलने के संकेत

जौनपुर.ऑयल एंड नेचुरल गैस रिसोर्सेस कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया के तहत देशभर में डीजल पेट्रोल गैस के साथ संभावित खनिज पदार्थ की खोज के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बांकी गांव मे ओएनजीसी के तहत सर्वे का काम चल रहा था.टीम की ओर से सर्वे करने के दौरान जमीन में बोरिंग कर धमाके किए जा रहे थे , जिसकी होने वाली आवाज  और कम्पन से गांव के लोग से सशंकित हो  गए. ऑइल एंड नेचुरल गैस रिसोर्सेज ऑफ इंडिया के कंपनसेशन इंचार्ज के अनुसार गांव के लोगों के भयभीत नहीं होना चाहिए.यह खोज का एक हिस्सा है. लिहाजा इसको प्रक्रिया के तहत ब्लास्ट करना पड़ता है.जौनपुर में क्रूड ऑयल मिलने संभावना है. बता दें की भारत में गैस पेट्रोल डीजल और खनिज पदार्थ की खोज के लिए लगातार ओएनजीसी काम कर रहा है। ऐसे में जब कहीं किसी इलाके में जमीन के अंदर नेचुरल पदार्थ होने की खबर मिलती है तो ओएनजीसी का सर्वे काम होता है। इसी के तहत जौनपुर जिले के बांकी गांव में सर्वे का काम चल रहा था ।  बांकी गांव के पूर्व प्रधान स्व गंगा प्रसाद सिंह के सुपुत्र सूरज सिंह ने बताया कि इंजीनियर द्वारा किये गए  बोरिंग के अंदर किये गए ब्लास्ट से धरती पर इतना कंपन होता था कि बाहर ज़मीन पर खड़ा कोई भी महसूस कर लेता था. एक तरफ जहां लोग सशंकित हैं तो वहीं दूसरी तरफ लोगों के अंदर गांव में कच्चा तेल मिलने की संभावना पर खुशी भी है।  बांकी गांव मे कच्चे तेल का भंडार अगर मिला तो इन गांवों की खुल जाएगी.  कंपनी के कर्मियों ने गांव में लगभग आठ जगहों पर बोरिंग कर भूमिगत धमाके किए थे.

ऑयल एंड नेचुरल गैस रिसोर्सेस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कंपनसेशन इंचार्ज ने बताया कि यहां पर सर्वे का काम चल रहा है, जिसमें जमीन के अंदर खनिज पदार्थ होने की खोज की जा रही है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में 6 से 7 महीने का समय लगेगा। यह काम हमारा आगे चलता रहेगा, रिपोर्ट देहरादून भेजी जा रही है,रिपोर्ट आने के बाद ही  कच्चे तेल की पुष्टि होगी।  अधिकारी ने बताया कि 120 फीट से 180 फीट बोरिंग कर उपकरणों के सहारे तीन किलोमीटर नीचे की फ्रीक्वेंसी चेक की गई और रिपोर्ट देहरादून भेजा गया है. इससे पहले कंपनी ने सेटेलाइट के जरिए सर्वे किया था। जिसमे क्रूड आयल मिलने के संकेत मिले थे.कंपनी के कर्मियों ने गांव में आठ जगहों पर बोरिंग कर भूमिगत धमाके किए। बोरिंग स्थल से 20 मीटर दूर पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से आसपास के क्षेत्रों में संभावनाओं को तलाशा गया था। वहीं, धमाकों से उत्पन्न तरंगों को रिकार्ड किया गया।

क्रूड ऑयल क्या है?
दरअसल, क्रूड ऑयल एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला चिपचिपा, काला तरल है, जो मुख्यत: हाईड्रोजन और कार्बन से बने हाइड्रोजन का जटिल मिश्रण होता है। जानकारी के मुताबिक, लाखों साल पहले समुद्री जीवों के अवशेषों से बनता है जो भूवैज्ञानिक दबाव और गर्मी के कारण तरल में परिवर्तित हो जाते हैं। इस पृथ्वी के भीतर तेल के कुओं और तेल रिग्स से निकलता है। यही क्रूड आयल रिफाईनरियो  द्वारा डीजल  पेट्रोल आदि अलग किया जाता है.

बता दें कि आज के लगभग साठ पैसठ साल पहले ज़ब आसानी से डीजल नहीं मिल पाता था तब गावों मे क्रूड आयल से चलने वाले इंजिन दिखाई पड़ते थे जिससे लोग आटा चक्की आदि चलाते थे.

इसी गांव बांकी मे ही सन 1964 मे श्री मोलारक श्रीवास्तव के पास क्रूड आयल इंजिन था जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे.

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