वृद्धाश्रम में अपनी जिंदगी की सांझ बिता रहे हैं बुजुर्गों का छलका दर्द

जौनपुर। शिक्षित संताने बड़े शहरों में व्यवसाय कर रहीं है, कोई सरकारी या निजी संस्थानों में उच्च पदों पर कार्यरत है, तो किसी के बेटे-बहू विदेशों में बेहतर जीवन जी रहे हैं। लेकिन इन षिक्षित संतानो के 55 माता पिता जौनपुर के सैयद अलीपुर स्थित वृद्धाश्रम में अपनी जिंदगी की सांझ बिता रहे हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को काबिल बनाने में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। अपनी युवावस्था मे अपनी खुषियों पर बुल्डोजर चला कर दफन कर अपने बच्चों के लिये पैसा बचाये रखा ताकि उन्हे अच्छी षिक्षा देकर योग्य बनाया जा सके ताकि वे सरकारी गैर सरकारी संस्थानो मे अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकें अच्छे व्यवसाय कर अपार धन कमा सकें। लेकिन इन्हे तमाम उपलब्धियां मिली तो माता-पिता के लिए इनका समय, सम्मान और अपनापन कहीं खो गया है। बच्चों की सफलता में ही पिता अपनी खुशी तलाशता है लेकिन जब वही पिता उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचता है तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत अपने बच्चों के साथ और सहारे की होती है। पिता ने जिनको उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उन बच्चों के पास आज अपने बुजुर्ग माता के लिये आधुनिक जीवनशैली और व्यस्तताओं के बीच समय नहीं बचा। अब तो मौत तक वृद्धाश्रम के अलावा और कोई सहारा नही।