अपराध

माननीय उच्च न्यायालय को जबाब नहीं दे पा रहा जिला प्रशासन

मामला जौनपुर मे कन्हैईपुर भीटा भूमि आराजी नंबर 11 पर माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बादकूट रचना कारित नाम दर्ज करना राजस्व कर्मी द्वारा किया गया अपराध और एक ही अदालत मे एक ही प्रॉपर्टी पर भूमाफिया प्रवृत्ति के व्यक्ति द्वारा एक साथ दो अलग अलग मुक़दमे करना गंभीर अपराध मे राजस्व कर्मी और भूमाफिया को जेल जाने से बचाने के प्रयास मे अब तक प्रशासन द्वारा सही रिपोर्ट नहीं दी जा सकी है.

जौनपुर.  लाइनबाजार थाना क्षेत्र  कन्हैईपुर आराजी नंबर 11 जो भीटा दर्ज है पर  माननीय उच्च न्यायालय  द्वारा दिया गया स्थगन आदेश  की अवमानना कर  भूमाफिया प्रवृत्ति के व्यक्ति द्वारा कूट रचना कारित डॉक्यूमेंट द्वारा नाम दर्ज कराया गया और  प्रशासन द्वारा भवन निर्माण करने की छूट दी गई.. इस सम्बन्ध मे वादी दीपनारायण यादव  उक्त जानकारी मा हाई कोर्ट मे दी गयी. तो मा. हाई कोर्ट ने रिट संख्या 7258/ 2025 में निम्न 3 बिंदुओं पर कार्यवाही का आदेश दिया और 90 दिन के अंदर जिला प्रशासन जौनपुर को जबाब देने का आदेश दिया गया. तीन बिंदुओं का जबाब जिला प्रशासन नहीं दे पा रहा है. जो अब गले की हड्डी बन गया. इनका सही जवाब देने पर कई राजस्व कर्मी एवं  भूमाफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना होगा जो प्रशासन नहीं चाह रहा है.
1 -गाटा संख्या 11 के ख़तौनी से माननीय उच्च न्यायालय तथा अन्य अधीनस्थ न्यायालय का आदेश कैसे हटाया गया
2 -जब बीरबल 2006 में ही धारा 59 T Act me SDM court में गाटा संख्या 11 का मुकदमा हार गया था तो फिर उसी धारा 59 T Act। में उसी गाटा 11 के लिए 2003 में किए गए पैरलल मुकदमे चलाकर के 2016 कैसे निर्णय प्राप्त कर लिया जबकि यह सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि सेम नाम ,बनाम ,तथा सेम गाटा संख्या का already चल रहे मुकदमे के साथ यदि पैरेलल मुकद्दमा चलाकर कोई anutos प्राप्त किया जाएगा तो वह अनुतोष शून्य माना जायेगा तथा उसका अनुपालन
2020 मे कैसे खतौनी पर किया गया जबकि यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध है।
3 – जब 2021 में जिलाधिकारी के निर्देश पर हुए जांच में 2016 के SDM के निर्णय के अनुपालन में बीरबल का
नाम गाटा संख्या 11 में दर्ज़ करना विधि विरुद्ध पाया गया था तो उस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई।   जिला प्रशासन ज्यो ही उक्त बिन्दुओ पर सही जबाब देता है तो दोषी लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराना होगा और 2006 के मुकदमे को छिपा कर जबाब देते है तो वादी की माननीय उच्च न्यायालय की अवमानना  संबंधी पत्रांवली के साथ   न्यायालय मे जाने के लिए पूरी फ़ाइल तैयार कर बैठा है..

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